Giloy Benefits: गिलोय के अद्भुत फायदे और उपयोग – आयुर्वेद की अमृता

Giloy Benefits, Giloy (गिलोय) जिसे आयुर्वेद में अमृता कहा जाता है, एक अद्भुत औषधि है। इसका वैज्ञानिक नाम Tinospora Cordifolia है और इसे गुडुची, मधुपर्णी, चक्रांगी आदि कई नामों से जाना जाता है। हिन्दू शास्त्रों में इसे अमृत के समान माना गया है, इसलिए यह सदियों से औषधि के रूप में उपयोग होती आ रही है।

गिलोय क्या है?

गिलोय एक बेलनुमा लता है जो जंगलों, घरों, बाग-बगीचों और नीम-आम के पेड़ों पर खूब पाई जाती है। जिस पेड़ पर यह चढ़ती है उसके गुण भी अपने अंदर समाहित कर लेती है। इसी कारण नीम पर चढ़ी गिलोय सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है।

आयुर्वेद में गिलोय का महत्व

आयुर्वेद के अनुसार गिलोय बुखार की सर्वोत्तम दवा है। किसी भी प्रकार का पुराना बुखार, वायरल इंफेक्शन, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और विषम ज्वर को नष्ट करने में यह अत्यंत प्रभावी है।

गिलोय के गुण (Giloy Benefits)

  • त्रिदोष नाशक – वात, पित्त और कफ को संतुलित करती है
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है
  • शरीर शोधन और रक्त शुद्धि करती है
  • शुगर को नियंत्रित करने में सहायक
  • गठिया व जोड़ों के दर्द में राहत
  • दमा, खांसी, एलर्जी में लाभकारी
  • लीवर-किडनी को मजबूत बनाती है
  • त्वचा रोग जैसे एक्जिमा, सोरायसिस में उपयोगी
  • बुढ़ापा रोकने वाली प्राकृतिक औषधि

गिलोय के फायदे (Giloy Ke Fayde)

सुबह खाली पेट गिलोय की लगभग 3–4 इंच की ताजा डंडी चबा कर खाने से शरीर को संजीवनी जैसी शक्ति मिलती है। यह असाध्य रोगों के इलाज में भी सहायक मानी गई है।

1. बुखार में लाभकारी

टाइफॉयड, मलेरिया, डेंगू और वायरल बुखार को कम करने में गिलोय रामबाण औषधि मानी गई है।

2. गठिया व सूजन में कारगर

गिलोय के पाउडर में सौंठ और गुग्गुल मिलाकर सेवन करने से सूजन, जोड़ों का दर्द और आर्थराइटिस में आराम मिलता है।

3. त्वचा रोगों के लिए लाभकारी

गिलोय को नीम और आंवला के साथ मिलाकर लेने से एक्जिमा, सोरायसिस, खुजली और अन्य त्वचा रोगों में लाभ मिलता है।

4. शुगर कंट्रोल

गिलोय को डायबिटीज के प्रबंधन के लिए भी उपयोग किया जाता है क्योंकि यह रक्त शर्करा को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करती है।

5. कैंसर की रोकथाम

गिलोय की जड़ें शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होती हैं। यह कैंसर कोशिकाओं से लड़ने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है।

गिलोय रसायन (Giloy Rasayan)

गिलोय को एक शक्तिशाली रसायन माना गया है।

  • रक्तशोधक
  • ओजवर्धक – शरीर में ऊर्जा बढ़ाता है
  • हृदय रोग नाशक
  • लीवर टॉनिक
  • अग्नि वर्धक (पाचन सुधार)

कैंसर में गिलोय का विशेष प्रयोग

गिलोय का रस + गेहूं के जवार का रस + तुलसी + नीम के पत्ते मिलाकर सुबह खाली पेट एक कप सेवन करने से रक्त कैंसर में अत्यधिक लाभकारी माना गया है। यह अलोपैथिक उपचार के साथ भी लिया जा सकता है क्योंकि इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता।

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निष्कर्ष

गिलोय वास्तव में जीवनदायिनी अमृत है। नियमित सेवन से यह बुखार, संक्रमण, त्वचा रोग, पाचन समस्याएं, शुगर, गठिया, रक्त विकार और गंभीर बीमारियों तक में लाभ देती है। आयुर्वेद में गिलोय को संजीवनी माना जाता है और आधुनिक विज्ञान भी इसके गुणों को स्वीकार करता है।

Disclaimer: यह लेख केवल शिक्षा एवं जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी बीमारी के लिए चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

FAQ’s

गिलोय क्या है?

गिलोय (Tinospora cordifolia) एक आयुर्वेदिक औषधीय बेल है जिसे “अमृता” कहा जाता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई बीमारियों को दूर करने में उपयोगी है।

गिलोय इम्युनिटी कैसे बढ़ाता है?

गिलोय शरीर में वायरस, बैक्टीरिया और संक्रमण से लड़ने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं (immune cells) को सक्रिय करता है, जिससे इम्युनिटी प्राकृतिक रूप से मजबूत होती है।

क्या गिलोय का रोज़ाना सेवन करना सुरक्षित है?

हाँ, सामान्य मात्रा में गिलोय का सेवन सुरक्षित माना जाता है। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या या दवाई चल रही हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

गिलोय किन समस्याओं में फायदेमंद है?

गिलोय बुखार, वायरस संक्रमण, जुकाम, पाचन, डायबिटीज कंट्रोल, त्वचा, तनाव और इम्युनिटी बढ़ाने में लाभदायक है।

गिलोय का सेवन कैसे करें?

गिलोय का रस, पाउडर, कैप्सूल, उबालकर पानी, या गिलोय-नीम-तुलसी मिश्रण के रूप में सेवन किया जा सकता है।

क्या गिलोय के कोई साइड इफेक्ट हैं?

अधिक मात्रा में लेने पर लीवर एंजाइम बढ़ सकते हैं या कुछ लोगों में गैस्ट्रिक समस्या हो सकती है। इसलिए सीमित मात्रा में ही सेवन करें।

गिलोय रस कब पीना चाहिए?

सुबह खाली पेट या रात में सोने से पहले गिलोय रस लेना सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है।

क्या डायबिटिक लोग गिलोय ले सकते हैं?

हाँ, लेकिन गिलोय प्राकृतिक रूप से ब्लड शुगर कम करता है, इसलिए डायबिटिक मरीज डॉक्टर से सलाह लेकर ही सेवन करें।

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