मुलेठी(Mulethi) एक मीठी और औषधीय गुणों से भरपूर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग खांसी, गले के दर्द, पेट की जलन, एसिडिटी और सूजन जैसी समस्याओं में सदियों से किया जाता रहा है। इसकी जड़ में मौजूद प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट तत्व प्रतिरक्षा को मजबूत बनाते हैं और पाचन को सुधारते हैं। मुलेठी (Licorice) को आयुर्वेद में ‘यष्टिमधु’ भी कहा जाता है।
मुलेठी(Mulethi) की चाय, पाउडर या काढ़ा शरीर को त्वरित राहत देता है और गले को कोमल बनाता है। नियमित लेकिन सीमित मात्रा में इसका सेवन अनेक स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है। आइए, इस अद्भुत ‘मीठी जड़ी-बूटी’ के फायदों, उपयोग के तरीकों और सावधानियों के बारे में विस्तार से जानते हैं!
मुलेठी(Mulethi): आयुर्वेद का एक अनमोल उपहार
मुलेठी (वानस्पतिक नाम: Glycyrrhiza glabra) में कई ऐसे औषधीय वनस्पति-तत्व मौजूद हैं जो इसे खास बनाते हैं। यह प्रकृति में शीतल (ठंडी) और स्वाद में मीठी होती है।
मुलेठी(Mulethi) के मुख्य गुण:
* रस (स्वाद): मधुर (मीठा)
* वीर्य (शक्ति): शीत (ठंडा)
* प्रभाव: यह वायु और पित्त दोषों को शांत करती है, साथ ही कफ को भी बाहर निकालने में सहायक है।
* भावप्रकाश निघण्टु के अनुसार: मुलेठी ‘दीपनीय, स्वरदायक, वर्ण्य, चक्षुष्य, बल्य, और रक्तपित्तहर’ है।
मुलेठी के 7 अद्भुत स्वास्थ्य लाभ (Top Health Benefits of Mulethi)
मुलेठी का नियमित और सही उपयोग आपको कई स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है:
1. गला और स्वर सुधार (Sore Throat Relief)
मुलेठी का काढ़ा या चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से गले की खराश, सूजन और आवाज की समस्याओं में बहुत तेजी से आराम मिलता है। यह गायकों और वक्ताओं के लिए वरदान है।
निश्चित रूप से! मुलेठी का चूर्ण गले की समस्याओं के लिए सबसे प्रभावी और लोकप्रिय आयुर्वेदिक औषधियों में से एक है जिसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है।
यहाँ खांसी, गले के दर्द और गले की सूजन (pharyngitis) में तुरंत राहत देने वाली दो बहुत ही प्रभावी आयुर्वेदिक औषधियाँ दी गई हैं:
खांसी और गले के दर्द के लिए मुलेठी की विशेष आयुर्वेदिक औषधियाँ
1. कंठ सुधा योग (Kanth Sudha Yog – The Soothing Cough Paste)
यह मिश्रण गले की खराश, सूखी खांसी, और आवाज बैठने (hoarseness) के लिए अत्यंत लाभकारी है।
| सामग्री | मात्रा |
| मुलेठी चूर्ण (Licorice Powder) | 1 छोटा चम्मच (लगभग 3 ग्राम) |
| शहद (Honey – शुद्ध) | 1 छोटा चम्मच (लगभग 5 मिली) |
| काली मिर्च चूर्ण (Black Pepper Powder) | 1 चुटकी (लगभग 1/4 ग्राम) | |
| शुद्ध घी (Cow Ghee) | 1/2 छोटा चम्मच (वैकल्पिक, सूखी खांसी के लिए) | |
विधि और सेवन (Method and Dosage):
- एक छोटे कटोरे में मुलेठी चूर्ण और काली मिर्च चूर्ण को मिला लें।
- इसमें शहद और (यदि उपयोग कर रहे हैं तो) घी डालकर अच्छी तरह से पेस्ट बना लें।
- सेवन: इस मिश्रण को दिन में 2 से 3 बार धीरे-धीरे चाटें। इसे निगलने से पहले कुछ देर गले में रहने दें।
- लाभ: मुलेठी गले की सूजन कम करती है, शहद एंटी-माइक्रोबियल (रोगाणुनाशक) के रूप में कार्य करता है, और काली मिर्च कफ को बाहर निकालने में मदद करती है।
2. मुलेठी-अदरक काढ़ा (Licorice-Ginger Decoction for Cough)
यह काढ़ा श्वसन नली को साफ करता है और छाती में जमे हुए कफ को ढीला करने में मदद करता है।
| सामग्री | मात्रा |
| मुलेठी की जड़ के टुकड़े | 1 इंच का टुकड़ा (या 1/2 छोटा चम्मच चूर्ण) |
| ताजा अदरक (Crushed Ginger) | 1/2 इंच का टुकड़ा (कुटा हुआ) |
| तुलसी के पत्ते (Tulsi Leaves) | 4-5 पत्ते |
| पानी | 1.5 कप |
| गुड़ या शहद | स्वादानुसार (मीठा करने के लिए) |
विधि और सेवन (Method and Dosage):
- एक बर्तन में पानी, मुलेठी, अदरक और तुलसी के पत्ते डालें।
- इस मिश्रण को मध्यम आंच पर तब तक उबालें जब तक कि पानी एक कप तक न रह जाए (लगभग आधा होने तक)।
- काढ़ा छान लें और थोड़ा ठंडा होने दें।
- जब यह हल्का गर्म रहे, तब इसमें गुड़ या शहद मिलाकर पिएँ।
- सेवन: इसे दिन में 2 बार (सुबह और शाम) गरमागरम पिएँ।
सुरक्षा नोट: उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) से पीड़ित लोगों को मुलेठी का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए और उन्हें इसे नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
2. श्वसन तंत्र का रक्षक (Respiratory Health)
यह एक कफ-निसारक (expectorant) के रूप में कार्य करती है। दमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस, और खांसी में मुलेठी के सेवन को बेहद लाभकारी माना जाता है।
3. पाचन क्रिया में सहायक (Digestive Aid)
मुलेठी पेट और आँतों की समस्याओं, जैसे एसिडिटी (Acidity), पेप्टिक अल्सर, और पेट की सामान्य सूजन को कम करने में मदद करती है।
4. तनाव निवारक और याददाश्त (Stress and Memory)
यह एक नियमित शांतिकारक (Calmative) के रूप में कार्य करती है, जो मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है और तनाव को कम करने में सहायक है।
5. त्वचा रोगों में उपयोगी (Skin Health)
एक्जिमा, खुजली, और त्वचा की लालिमा जैसी त्वचा की सूजन (inflammation) को शांत करने में मुलेठी उपयोगी है।
6. हार्मोन संतुलन (Hormonal Balance)
महिलाओं में हार्मोनल संतुलन, मासिक धर्म की अनियमितता, और गर्भाशय से संबंधित समस्याओं के उपचार में इसे प्रभावी माना जाता है।
7. यकृत (Liver) की रक्षा
यह हेपेटाइटिस और लिवर की सूजन के इलाज में एक प्रभावशाली ‘हेपेटोप्रोटेक्टिव’ जड़ी-बूटी है।
Read Also – रोज़ाना नीम (Neem) का सेवन कैसे बदल सकता है आपकी सेहत? | 10 अद्भुत लाभ
मुलेठी(Mulethi) के घरेलू नुस्खे (Home Remedies of Mulethi)
मुलेठी का उपयोग आप विभिन्न तरीकों से कर सकते हैं:
* गले की खराश के लिए: मुलेठी पाउडर और शहद मिलाकर चाटें (दिन में 2-3 बार)।
* कफ और खांसी: मुलेठी, अदरक और तुलसी का काढ़ा बनाकर पिएँ।
* एसिडिटी (Acidity): 1/2 चम्मच मुलेठी चूर्ण + 1 कप ठंडा दूध, दिन में 2 बार लें।
* त्वचा की जलन या एक्जिमा: मुलेठी पाउडर + चंदन + गुलाब जल का लेप करें।
* नींद न आने की समस्या: रात को दूध में मुलेठी मिलाकर पीने से मन शांत होता है और नींद अच्छी आती है।
Read Also – Giloy Benefits: गिलोय के अद्भुत फायदे और उपयोग – आयुर्वेद की अमृता
(Mulethi)सेवन की विधि एवं मात्रा (Dosage and Administration)
* मुलेठी चूर्ण: 1–3 ग्राम तक।
* मुलेठी काढ़ा: 10 ग्राम मुलेठी को 1 कप पानी में उबालें, जब आधा रह जाए तो सेवन करें।
* मुलेठी रस: 5–10 मिली (लीटर), जल में मिलाकर।
* सेवन का समय: भोजन के बाद या चिकित्सक के सलाह से।
ध्यान दें: मुलेठी का सेवन हमेशा किसी अनुभवी वैद्य या डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।
मुलेठी के नुकसान व सावधानियाँ (Precautions and Side Effects)
* अल्पसंख्यक मात्रा में या थोड़े समय तक लेने से कोई खास दुष्प्रभाव नहीं होता है।
* अधिक सेवन: अधिक मात्रा में मुलेठी का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और जल प्रतिधारण (Water Retention) कर सकता है।
* यदि आप पहले से कोई दवा ले रहे हैं या आपको कोई गंभीर बीमारी है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
Read Also – कीड़ाजड़ी (Cordyceps) – हिमालय का चमत्कारी औषधीय खज़ाना
अन्य उपयोगी आयुर्वेदिक योगिक (Other Useful Ayurvedic Herbs)
मुलेठी(Mulethi) के साथ कई अन्य जड़ी-बूटियाँ भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं:
* कुटज
* कंडूघ्न
* इन्द्रयव
* पुनर्नवा मूल
* त्रिफला चूर्ण (त्वचा के लिए)
निष्कर्ष (Conclusion)
मुलेठी एक बहुमुखी और जादुई जड़ी-बूटी है जो न केवल आपको किचन की शोभा बढ़ाती है, बल्कि आपके शरीर को भी कई तरह से लाभ पहुँचाती है। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें और एक स्वस्थ, प्रसन्न और लंबी अवधि के जीवन का आनंद लें!
अस्वीकरण: यह ब्लॉग पोस्ट किसी विशिष्ट, एकल वैज्ञानिक शोध पत्र पर आधारित नहीं है, बल्कि सदियों पुराने आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान द्वारा समर्थित आम सहमति पर आधारित है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य सलाह के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।
FAQ’s
मुलेठी क्या होती है?
मुलेठी एक मीठी जड़ी-बूटी है जिसकी जड़ का उपयोग औषधीय रूप से किया जाता है। इसे आयुर्वेद में कई रोगों के उपचार के लिए रामबाण माना गया है।
मुलेठी के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
मुलेठी गले की खराश, खांसी, पेट की जलन, एसिडिटी, सूजन और प्रतिरक्षा बढ़ाने में उपयोगी होती है।
क्या मुलेठी खांसी और गले के दर्द में फायदेमंद है?
हाँ, मुलेठी की चाय या इसका चूसना गले को कोमल बनाता है और खांसी में राहत देता है।
मुलेठी को कैसे सेवन करना चाहिए?
मुलेठी को चाय में उबालकर, पाउडर के रूप में, काढ़े में या छोटी मात्रा में चूसकर लिया जा सकता है।
क्या मुलेठी रोजाना खा सकते हैं?
अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए। रोजाना 2–3 ग्राम से अधिक लेना उचित नहीं है, वरना साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं।
क्या मुलेठी से वजन बढ़ता है?
मुलेठी सीधे वजन नहीं बढ़ाती, लेकिन अत्यधिक सेवन से शरीर में पानी रुक सकता है, जिससे सूजन की समस्या हो सकती है।
किन लोगों को मुलेठी नहीं लेनी चाहिए?
उच्च रक्तचाप (BP), किडनी रोग या गर्भवती महिलाएँ मुलेठी का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें।
क्या मुलेठी गैस और एसिडिटी में लाभ देती है?
हाँ, मुलेठी की जड़ पेट की जलन और एसिडिटी को शांत करती है और पाचन सुधारती है।
क्या बच्चे मुलेठी ले सकते हैं?
हल्की खांसी या गले के दर्द में बच्चों को थोड़ी मात्रा दी जा सकती है, लेकिन डॉक्टर की सलाह बेहतर है।
क्या मुलेठी का कोई साइड इफेक्ट भी है?
अत्यधिक सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, और शरीर में पोटैशियम कम हो सकता है।
